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दिव्यता और नम्रता का अद्भुत संगम -श्रीमज्जगद्गुरु शङ्कराचार्यजी, श्रीगोवर्धनमठ-पुरीपीठ। "जो सत्पुरुष होते हैं, दिव्य होने पर भी उनकी मुग्धा शक्ति उन्हें महान नहीं देखने देती। भक्तों के जीवन में, संतों के जीवन में, महापुरुषों के जीवन में एक 'मुग्धा' नाम की शक्ति होती है। वो जितने महान होते हैं, वह शक्ति उनको तुच्छ करके ही दिखाती है। इसलिए उनके जीवन में कभी अहंकार नहीं पलता है। महापुरुष अपने जीवन में वैराग्य, भक्ति, मानवोचित शील-संयम कुछ नहीं पाते हैं, इसका अर्थ यह नहीं कि वो जैसा अपने जीवन को प्रस्तुत करते हैं वैसा ही होते हैं। ना तो वो झूठ बोलते हैं, ना उनके जीवन में अहंकार पलता है। भगवत कृपा से उनको मुग्धा नाम की शक्ति प्राप्त होती है, जिसके बल पर बहुत पूज्य होने पर भी वो अपने आप को तुच्छ समझते हैं।" #हिन्दूराष्ट्र #गो_हत्या_बंद भारत 'हिन्दुराष्ट्र' प्रचार-प्रसार प्रकल्प
मंदिरों से शासनतंत्र की परिचालना हो — शंकराचार्य https://youtu.be/6I7zVncOWSs?si=vPix-PgZPAAKJEW9 #हिन्दूराष्ट्र #गो_हत्या_बंद
मंदिरों से शासनतंत्र की परिचालना हो — शंकराचार्य
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आज पूज्य करपात्री जी महाराज का प्राकट्य दिवस है । महाराज ने अपना पूरा जीवन राष्ट्र के प्रति समर्पित किया , अपने खून से सीचा है महाराज ने भारत भूमि को । उनकी सबसे बड़ा कृपा प्रसाद के रूप में हमें पुरी शंकराचार्य जी को प्राप्त है । आज बहुत से लोग अपने को धर्म सम्राट कहते है , लेकिन धर्म सम्राट केवल और केवल करपात्री जी महाराज है उनके अतिरिक्त कोई नहीं । #गो_हत्या_बंद #हिन्दूराष्ट्र
https://youtube.com/shorts/s7IosZ__BT8?si=Oot7nvDVROBsi8T3
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'श्रीऋग्वेदीय पूर्वाम्नाय गोवर्द्धनमठ-पुरिपीठ' के विकास और संरक्षण हेतु ओड़िशा के मुख्यमन्त्री मोहन चरण मांझी की अध्यक्षता में लोकसेवा भवन (प्रदेश सचिवालय) में उच्चस्तरीय बैठक का आयोजन हुआ। बैठक में राजस्व मंत्री सुरेश पुजारी, विधि मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन, मुख्य सचिव अनु गर्ग, विकास आयुक्त डीके सिंह, श्री जगन्नाथ मंदिर के मुख्य प्रशासक डॉ. अरविंद पाधी, विधि सचिव डॉ. पबित्रा मोहन सामल, पुरी कलेक्टर दिब्यज्योति परिदा और पुरी पुलिस SP प्रतीक सिंह व वरिष्ठ अधिकारियों के सहित श्रीगोवर्द्धनमठ के विशेष प्रतिनिधियों के रूप में प्रफुल्ल ब्रह्मचारीजी, महेश ब्रह्मचारीजी, आदित्य प्रकाश ब्रह्मचारीजी एवं आदित्यवाहिनी प्रदेशाध्यक्ष मातृ प्रसाद मिश्रा भी शामिल हुए।
पुरी पीठ का पारंपरिक एवं भौगोलिक विस्तार स्वामी निश्चलानंद सरस्वती जी: "बांग्लादेश अधीन है... और काशी है ना... पूरे विश्व का 1/4 (एक बटा चार) हिस्सा पुरी पीठ के अधीन है। भगवान शंकराचार्य ने नेपाल को भी पुरी पीठ के अधीन ही रखा। इतना ही नहीं, चार कुंभ में एक कुंभ शंकराचार्य के क्षेत्र में आते हैं। प्रयाग तो हमारा क्षेत्र है और काशी भी पुरी पीठ का ही क्षेत्र है। यहाँ के मान्य पंडित जितने हैं, वो भले ही समझते हों कि शंकराचार्य उनके अधीन होते हैं... 'I am the maker of Shankaracharya' ऐसे पंडित भले ही मानें, वस्तुस्थिति यह है कि काशी तक ही नहीं, प्रयाग तक पुरी पीठ का क्षेत्र है। पूरा नेपाल को भगवान शंकराचार्य ने पुरी पीठ के अंतर्गत माना। आज जो बांग्लादेश है, वह भी पुरी पीठ की सीमा में ही है।" https://youtu.be/WZEccNinCr0?si=2_RBumTUwpyzZuA- #हिन्दूराष्ट्र #गो_हत्या_बंद
पुरी शंकराचार्य जी के मुखारविंद से धर्म सम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज का जीवन परिचय l https://youtu.be/doogkujKdoA?si=ICbE6E1l0J4U3ZaJ #हिन्दूराष्ट्र #गो_हत्या_बंद भारत 'हिन्दुराष्ट्र' प्रचार-प्रसार प्रकल्प
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मार्क्सवाद और रामराज्य नामक ग्रंथ है हमारे पूज्य गुरुदेव का। जिसके प्रभाव से 72 वर्ष पहले ही जो नेहरू जी भारत को रूस की नकल करके कम्युनिस्ट राष्ट्र बनाना चाहते थे, नहीं बन सका। पूज्य गुरुदेव धर्मसम्राट करपात्री जी महाराज के उस ग्रंथ की देन है। मार्क्सवाद और रामराज्य ग्रंथ के कारण ही भारत में जो कम्युनिस्टों का शासनतंत्र 72 वर्ष पहले आ रहा था, नहीं आ पाया अब तक। कहीं कहीं छिट-पुट आया, वो ग्रंथ की महिमा है। उन्होंने चार्वाकों की ओर से पूर्व पक्ष रखा कि अगर आत्मतत्त्व स्वतंत्र कोई होता, आत्मा कोई स्वतंत्र तत्त्व हो, तो उसकी स्वतंत्र अभिव्यक्ति होनी चाहिए। सामान्य वाच्य युक्ति से पूज्य गुरुदेव ने चार्वाकों को उत्तर दिया है। आप जो हो, प्रत्यक्ष को प्रमाण मानते हो। केवल प्रत्यक्ष ही प्रमाण आपके यहाँ है। प्रत्यक्ष प्रमाण के बल पर पृथ्वी, जल, तेज, वायु भूत चतुष्टय को तो आप मानते हो। अतीन्द्रिय कोटि के पृथ्वी को न मानो, जल को न मानो, तेज को न मानो, वायु को न मानो, लेकिन इन्द्रिय गोचर पृथ्वी, जल, तेज, वायु का अस्तित्व आप मानते हो। अग्नि का दर्शन स्वतंत्र रूप से दिखा दो फिर। पाषाणगत, दारुगत अग्नि है, पृथक से दर्शन करा दो। अभिव्यंजक संस्थान अगर अग्नि को प्राप्त न हो, तो अग्नि का अस्तित्व है इसमें क्या प्रमाण? इसका मतलब स्वतंत्र रूप से अग्नि का दर्शन न होने पर भी आपके यहाँ जैसे अग्नि का अस्तित्व आपको मान्य है, उसी प्रकार से अभिव्यंजक संस्थान - देह, इन्द्रिय, प्राण, अन्तःकरण के बिना आत्मतत्त्व का पृथक स्वतंत्र स्फुरण न होने पर भी, आपको आत्मा का अस्तित्व स्वीकार करना चाहिए। जैसे कि श्रीमद्भागवत और महाभारत का उदाहरण है। क्या उदाहरण है? अगर सूर्य और चंद्र न हों, तो राहु का स्वतंत्र दर्शन ही संभव नहीं है। इसका मतलब कदाचित कोई ऐसा तत्त्व है जिसका अस्तित्व तो है, लेकिन अभिव्यंजक संस्थान का हमको विज्ञान नहीं है। तो हम अपनी भावना और बुद्धि के स्तर के अनुसार उसका अस्तित्व का [प्रतीक] कर सकते हैं। पर जब अभिव्यंजक संस्थान हमको प्राप्त हो जाता है तब उसका अस्तित्व हमको मानने के लिए बाध्य होना पड़ता है। जैसे कि अभिव्यंजक संस्थान सूर्य-चंद्र के योग से राहु का अस्तित्व हम मानने के लिए बाध्य हैं। -श्रीमज्जगद्गुरु शङ्कराचार्यजी, श्रीगोवर्धनमठ-पुरीपीठ। #गो_हत्या_बंद #हिन्दूराष्ट्र
*अनन्तश्रीसमलङ्कृत अभिनवशङ्कर यतिचक्रचूडामणि राजराजेश्वर विश्ववन्द्य सर्वभूतहृदय श्रीमत्परमहंसपरिव्राजकाचार्य श्रोत्रिय-ब्रह्मनिष्ठ वेदभाष्यकार धर्मसम्राट् स्वामी श्रीहरिहरानन्दसरस्वतीजी 'श्रीकरपात्रीजी' महाभाग के ११९वाँ प्राकट्यमहोत्सव की सभी को शुभकामनाएँ* भूयाद्भारतमस्माकमखण्डं धर्ममण्डितम् । स्वामिनां करपात्राणां वर्द्धतां धर्मसंहतिः ॥ 🪷🙏🏻
भगवद् भजन दिन मे 5 बार 15-15 मिनट करना चाहिए
#RSS धर्म के बिना राजनीति विधवा है, और राजनीति के बिना धर्म विधुर है,, धर्मसम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज 🚩
पुरी शंकराचार्य जी के मुखारविंद से धर्म सम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज का जीवन परिचय l