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पुस्तक परिचय - तुमची वाचनाची आवड वाढविण्यासाठी येथे चांगल्या दर्जेदार मराठी पुस्तकांचा परिचय करून देण्यात येतो.

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  • बिंब प्रतिबिंब Author : Chandrakant Khot Publisher : Dimple Publication ही विवेकानंदांच्या जीवनकार्यावरील आत्मचरित्रात्मक कादंबरी समाजाच्या विकासाच्या दृष्टिने चंद्रकांत खोत यांनी लिहिली आहे.... रामकृष्ण परमहंस आणि विवेकानंद या परमश्रेष्ठ गुरू-शिष्यांनी घडविलेला इतिहास आणि संस्कृतिच्या समृद्धीकरणार्थ बजावलेली कामगिरी प्रभावीपणे मांडणारी 'बिंब-प्रतिबिंब' ही कादंबरी....

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  • चक्र Author : Jaywant Dalvi Publisher : Majestic Publishing House जयवंत दळवी यांची ही पहिलीच कादंबरी असली, तरी मराठी वाचकांना ते अपरिचित नाहीत.... त्यांच्या आजपर्यंतच्या प्रकाशित साहित्यातील खुसखुअशीत अनुभवांच्या चुरचुरीत चित्रणाने आणि प्रवाही भाषाशैलीने वाचक प्रभावित झाले.... परंतु ’चक्र’ कादंबरीमुळे गंभीर जीवनदर्शन आणि भेदक शैली हे त्यांचे विशेष जवळजवळ प्रथमच प्रकाशात येत आहेत....

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  • सीमान्त Author : Medha Inamdar Publisher : Unmesh Prakashan द्रौपदी !... महाभारतातील महानायिका !... जणू तेजाचे साकार रूपच !... कौरव - पांडवांमधील शत्रुत्व जरी त्यांच्या जन्माबरोबरच जन्मले असले तरीही द्रौपदीच्या अस्तित्वाने त्या शत्रूत्वाला एक ठळक कारण प्राप्त झाले.... पांडवांच्या जीवनात द्रौपदीने प्रवेश केल्यापासूनच सारे महाभारत केवळ तिच्या भोवतीच फिरत राहते....

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  • त्रिपदी Author : G. N. Dandekar Publisher : Mrunmayi Prakashan श्री. गोपाल नीलकण्ठ दाण्‍डेकर या बहुआयामी व बहुप्रसव लेखकाच्या चोखंदळपणे निवडलेल्या स्फुट लेखांचा हा नवा संग्रह 'त्रिपदी'.... वेगवेगळ्या काळांत, वेगवेगळ्या निमित्तानं लिहिलेले हे लेख आजवर कुठंही संगृहीत झालेले नव्हते.... ते आतां या पुस्तकांत एकत्र केले आहेत.... या पुस्तकांतील लेखांची प्रकृति लक्षात घेतां त्यांचीही विभागणी सामान्यत: आत्मपर, व्यक्तिविषयक आणि ललितलेख अशी तीन प्रकारांत होते, म्हणूनच ही त्रिपदी.... ह्या सार्‍याच स्फुट लेखांमधून त्यांचा समृध्द जीवनानुभव, अनुभवाची मांडणी करण्याची त्यांची खास शैली, भाषेच्या नियोजनाचं सामर्थ्य, त्यांच्या लेखनांतील उत्कटता, चित्रवर्णता, माणसा-माणसांमधल्या नात्याकडं पाहण्याची त्यांची खास दृष्टी अशा गोष्टींचा पुन:प्रत्यय येतो.... शब्द, स्पर्श, रूप, रस आणि गंध या पांची संवेदनांची त्यांची जाणीव केवढी तीव्र होती, ह्यांचीं अनेकानेक उदाहरणं या लेखांमध्ये आढळतात....दाण्डेकरांमधला परिभ्रामक, संवेदनशील कलावंत, भाषेवर हुकुमत असणारा लेखक, छायाचित्रकार, आपल्याला भावलेलं शब्दांमधून प्रकट करायची ऊर्मि असलेला साहित्यिक या सार्‍याच स्फुट लेखनांत सर्वत्र भेटत राहतो.... आणि त्याचा आस्वाद घेत असतांना निखळ आनंद लाभत राहतो....

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