Imam Ali Khamenei — Hindi
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🌹| शहीदा ज़हरा गुलपायगानी के दफ़्न का चालीसवाँ आज शहीद रहबर इमाम सय्यद हुसैनी ख़ामेनई (र) की चौदह माह की नवासी, शहीदा ज़हरा मोहम्मदी गुलपायगानी के दफ़्न का चालीसवाँ है। शहीद रहबर और उनके ख़ानदान की अज़ीम क़ुर्बानियों में नन्ही ज़हरा की शहादत सबसे दिलसोज़ क़ुर्बानियों में से एक थी। ये वही मासूम बच्ची थीं जिन्हें उनकी वालिदा ने ज़ियारत-ए-अरबईन के दौरान हरम-ए-इमाम हुसैन (अ) में तवस्सुल करके अल्लाह तआला से माँगा था। चौदह माह की शहीदा ज़हरा, हज़रत सकीना (स) और हज़रत अली असग़र (अ) के क़ाफ़िले से जा मिलीं। मिसाइल हमले के बाद उनका टुकड़े-टुकड़े जिस्म दो दिन बाद उनके घर के मलबे से मिला और उन्हें भी इमाम हुसैन (अ) की राह में क़ुर्बान होने वाले अली असग़र (अ) की तरह, शहीद रहबर के सीने पर रखकर सुपुर्द-ए-ख़ाक किया गया। ये मासूम शहीदा, इस ख़ानदान की हुसैनी क़ुर्बानी की एक दर्दनाक निशानी हैं। #WeMustRise ▫️ | 📱 WhatsApp | 🌐 Telegram | 📱 Instagram
🖤🖤| शहीद इमाम सय्यद अली हुसैनी ख़ामेनई (र) के दफ़्न के चालीसवें की मुनासिबत पर फ़क़ीह-ए-आली क़द्र हज़रत आयतुल्लाह जाफ़र सुबहानी (द); शहीद इमाम ख़ामेनई (र) और उनके साथ शहीद हुए अहले-ख़ाना के मज़ारात की ज़ियारत के लिए हाज़िर हुए। ▫️ | 📱 WhatsApp | 🌐 Telegram | 📱 Instagram
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📕 | [First time published] | शहीद इमाम सय्यद अली हुसैनी ख़ामेनई (र) के दफ़्न के चालीसवें की मुनासिबत से आपके दफ़्तर की जानिब से आपकी ये तस्वीर पहली बार पब्लिश्ड की गई है, जिसमें आप अपनी ज़ाती लाइब्रेरी में क़ुरआन की तिलावत कर रहे हैं। ▫️ | 📱 WhatsApp | 🌐 Telegram | 📱 Instagram
🏴 | शहीद इमाम सय्यद अली ख़ामेनई (र) के दफ़्न के चालीसवें की मजालिस के जलसे का इनइक़ाद: शहीद इमाम सय्यद अली ख़ामेनई (र) के दफ़्न के चालीसवें की मजालिस के जलसे का इनइक़ाद रहबर-ए-इंक़िलाब-ए-इस्लामी आयतुल्लाह सय्यद मुज्तबा हुसैनी ख़ामेनई (द) की जानिब से किया जाएगा। 🗓 | मंगलवार, 18 अगस्त 2026, शाम 5 से 7 बजे तक ▫️ तेहरान: मुसल्ला-ए-इमाम ख़ुमैनी (र) 🗓 | बुधवार, 19 अगस्त 2026, नमाज़-ए-मग़रिब और ईशा के बाद ▫️ क़ुम: हरम-ए-हज़रत मासूमा (स) 🗓 | गुरुवार, 20 अगस्त 2026, इमाम हसन असकरी (अ.) की शहादत की शब के मौक़े पर, नमाज़-ए-मग़रिब और ईशा के बाद ▫️ मशहद: हरम-ए-मुतह्हर-ए-हज़रत इमाम रज़ा (अ) ▫️ | 📱 WhatsApp | 🌐 Telegram | 📱 Instagram
📚 | इमाम तक़ी, नक़ी और असकरी (स) पर बहुत कम काम होता है, रिसर्चर्स और आर्टिस्ट्स अपने काम करें और ज़्यादा तादाद में तख़लीक़ात और राइटिंग्स सामने आएँ। 04/01/2025 को इमाम अली नक़ी अलैहिस्सलाम के यौम-ए-शहादत पर मजलिस-ए-अज़ा के आख़िर में शहीद इमाम सय्यद अली ख़ामेनई (र) ने इमाम मुहम्मद तक़ी, इमाम अली नक़ी और इमाम हसन असकरी अलैहिमुस्सलाम पर तवज्जोह देने की गुज़ारिश की। शहीद इमाम सय्यद अली ख़ामेनई (र) ने इस बात पर तन्क़ीद की कि मजालिस और किताबों में इमाम मुहम्मद तक़ी, इमाम अली नक़ी और इमाम हसन असकरी अलैहिमुस्सलाम पर बहुत कम काम होता है। आपने कहा कि इन तीनों इमामों के ज़माने में शियाओं की तादाद और इल्मी कामों के लिहाज़ से शिया समाज ने दूसरे कई दौरों की तुलना में बहुत तरक़्क़ी की। आपने तशय्यु के फ़रोग़ में इमाम अली नक़ी (अ) के बे-मिसाल किरदार और इसी तरह उनके बेटे और उनके वालिद की अज़ीम ख़िदमात का हवाला देते हुए कहा कि तारीख़-ए-इस्लाम के किसी भी दौर में तशय्यु को इन तीनों इमामों के दौर जैसी वुसअत नहीं मिली। इमाम अली नक़ी और इमाम मुहम्मद तक़ी (अ) के ज़माने में बग़दाद और कूफ़ा शियाओं के अहम मराकिज़ बन गए और शिया तालीमात व मआरेफ़ की तरवीज में इन दोनों हस्तियों का किरदार बे-मिसाल रहा। आपने इन तीनों इमामों की ज़िंदगी और तालीमात पर तारीख़ और आर्ट जैसे मुख़्तलिफ़ शोबों के ज़रिए तवज्जोह दिए जाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। इन तीनों इमामों की ज़िंदगी पर कम-हक़्क़ा तवज्जोह दिए जाने पर तन्क़ीद करते हुए कहा कि अफ़सोस का मक़ाम है कि तारीख़ की निगारिश, किताबत और यहाँ तक कि मजालिस में भी इन तीनों इमामों की ज़िंदगी और इल्म पर कम तवज्जोह दी जाती है। ज़रूरत है कि रिसर्चर्स और आर्टिस्ट्स अपने काम करें और ज़्यादा तादाद में तख़लीक़ात और राइटिंग्स सामने आएँ। #ImamTaqi #ImamHadi #ImamAskary ▫️ | 📱 WhatsApp | 🌐 Telegram | 📱 Instagram
🇮🇷: 🇵🇸 | 09/07/2026 | ग़ज़्ज़ा (फ़िलिस्तीन) के अवाम ने शहीद इमाम सय्यद अली ख़ामेनई (र) के लिए ग़ायबाना नमाज़ अदा की। #WeMustRise ▫️ | 📱 WhatsApp | 🌐 Telegram | 📱 Instagram
🖤🖤| शहीद रहबर के मक़बरे पर लाखों का हुजूम, दुनिया भर से अक़ीदतमंदों की आमद जारी: शहीद रहबर इमाम सय्यद अली ख़ामेनई (र) के मक़बरे पर रोज़ाना लाखों की तादाद में अक़ीदतमंद हाज़िरी दे रहे हैं। दुनिया के मुख़्तलिफ़ मुमालिक से ज़ायरीन और चाहने वाले लगातार पहुँच रहे हैं और सहन-ए-दारुलज़िक्र में इश्क़, ग़म और हुज़्न से भरे हुए रूहानी मंज़र देखने को मिल रहे हैं। इमाम अली रज़ा (अ) की शहादत के मौक़े पर हरम-ए-इमाम रज़ा (अ) के सहन में मदफ़ून शहीद इमाम ख़ामेनई (र) की क़ब्र-ए-मुबारक और उनके हमराह मदफ़ून दीगर शुहदा की क़ुबूर पर भी लाखों अफ़राद का इज्तिमा हो रहा है। ज़ायरीन हरम-ए-इमाम रज़ा (अ) में हाज़िरी के बाद शहीद रहबर की क़ब्र-ए-मुबारक पर पहुँचते हैं, जहाँ अक़ीदत और एहतराम के साथ सलाम पेश करते और फ़ातिहाख़्वानी करते हैं। ज़ायरीन शहीद रहबर की जुदाई के ग़म में अश्कबार होते हैं और उनकी क़ब्र-ए-मुबारक पर अपने जज़्बात का इज़हार करते हैं। सहन-ए-दारुलज़िक्र में हर रोज़ अक़ीदतमंदों की आमद का सिलसिला जारी है, जहाँ ज़ायरीन शहीद रहबर और दीगर शुहदा को ख़िराज-ए-अक़ीदत पेश करते हुए उनके लिए फ़ातिहाख़्वानी और दुआ करते हैं। ▫️ Join: 📱WhatApp | 🌐 Telegram
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