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:: अध्यात्म का पथ - 29 :: इस संसार में अनेक प्रकार के मद ( अभिमान, अहंकार , घमंड , नशा ) हैं जैसे - :धन का मद: यह धतूरे के मद से भी बड़कर है । : शारीरिक बल का मद: पहलवान इसका उदाहरण है। हमेशा घमंड से चलता है । : साधना का मद: कई बार योगसाधक को अपने तप की शक्ति का मद हो जाता है। अपना अनुभव समाज के साथ नहीं बांटता है । : विद्या का मद : अनेक विद्वान न केवल अपने ज्ञान की स्वयं प्रशंसा करते रहते हैं बल्कि अपने को पूर्ण ज्ञानी मानते हैं । :: राज - सत्ता का मद: अनेक नेता सियासी सत्ता के घमंड में देश के संविधान की भी जानबूझकर अवहेलना करते हैं।स्वयं को संविधान से ऊपर मानते हैं । :: शारीरिक सुंदरता का मद : ईश्वर द्वारा दी गई शारीरिक सुंदरता को पाकर मनुष्य घमंडी हो जाता है ।यह भूल जाता है कि यह सुंदरता क्षणिक है। समय के साथ नष्ट होने वाली है । ये सब तुच्छ हैं । इनका परिगणन ( गिनती/ आंकलन ) काम- क्रोध , लोभ- मोह , मद- मतसर - इन छ: शत्रुओं में है ।शत्रु होने से यह उपरोक्त सभी मद त्याज्य हैं । परंतु, प्रभु ने इन सब से ऊपर एक और मद हमारे अंदर उत्पन्न किया है ।इसका नाम है "सोम की सुरक्षा "।सोम का यहाँ अर्थ है वीर्य / शुक्र धातु / प्राण शक्ति । सोम के सुरक्षित होने पर इसका अनुभव होता है । इस सोम की सुरक्षा ब्रह्मचर्य पालन द्वारा होती है ।यह सोम जनित मद, उल्लास हमें दिव्यता की ओर ले जाता है ।हमारे अन्दर पाप का नामशेष भी नहीं रहता है ।हमारा जीवन सचमुच पवित्र व दिव्य बन जाता है।सोमजनित मद , वास्तव में, वरणीय है। यह आध्यात्मिक उन्नति का आधार भी है। मदन अनेजा योग शिक्षक लेखक: ईश्वर उपासना व ध्यान
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विश्वास जितना मजबूत होगा, परिणाम उतना बड़ा मिलेगा। महापुरुषों का विश्वास इतना प्रबल होता है कि वे असंभव को भी संभव कर देते हैं। संशय (डाउट) सबसे बड़ा बाधक है। “संशयात्मा विनश्यति” — जो व्यक्ति संदेह में रहता है, उसका पतन हो जाता है। शुद्ध संकल्प और सकारात्मक विचार जरूरी हैं। बुरे विचारों को छोड़कर अच्छे विचार अपनाने से जीवन में उन्नति होती है। रोज सोने से पहले पवित्र संकल्प करें। इससे अंदर की नकारात्मकता खत्म होती है और एक नई ऊर्जा पैदा होती है। धैर्य रखें (Patience जरूरी है)। तुरंत फल न मिले तो निराश न हों, लगातार प्रयास करते रहें। हर प्रयास कभी व्यर्थ नहीं जाता। “नहि कल्याणकृत् कश्चित् दुर्गतिं तात गच्छति” — जो अच्छा कर्म करता है, उसका कभी बुरा नहीं होता। प्रकृति का नियम: जैसा करोगे वैसा पाओगे। जैसे पहाड़ में आवाज गूंजती है, वैसे ही हमारे कर्म और संकल्प भी लौटकर आते हैं।
जिसने सुबह को जीत लिया उसे दिन हरा नहीं सकता आपकी सुबह ही आपके पूरे दिन की दिशा दशा और दृढ़ता को निर्धारित करती है ✨🕉️🌸💫
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महर्षि दयानंद सरस्वती जी के ग्रन्थों से ब्रह्मचर्य विषयक वचनों का संग्रह । हमारा सभी का कर्तव्य है कि हम अपने ऋषि के दिव्य वचनों को धारण करके जीवन को पवित्र बनावें। 1. जिसके शरीर में वीर्य नहीं होता, वह नपुंसक, महाकुलक्षणी और जिसको प्रमेह रोग होता है, वह दुर्बल, निस्तेज-निर्बुद्धि और उत्साह-साहस-धैर्य-बल, पराक्रम आदि गुणों से रहित होकर नष्ट हो जाता है। (सत्यार्थप्रकाश, 2 समुल्लास) 2. देखो, जिसके शरीर में सुरक्षित वीर्य रहता है, उसको आरोग्य, बुद्धि, बल और पराक्रम बढ़ कर बहुत सुख की प्राप्ति होती है। (सत्यार्थप्रकाश, 2 समुल्लास) 3. जो सदा सत्याचार में प्रवृत्त, जितेन्द्रिय और जिनका वीर्य अधःस्खलित कभी न हो उन्हीं का ब्रह्मचर्य सच्चा होता है। (सत्यार्थप्रकाश, 4 समुल्लास) 4. जिस देश में यथायोग्य ब्रह्मचर्य विद्या और वेदोक्त धर्म का प्रचार होता है, वही देश सौभाग्यवान् होता है। (सत्यार्थप्रकाश, 3 समुल्लास) 5. सर्वत्र एकाकी सोवे। वीर्य स्खलित कभी न करें। जो कामना से वीर्य स्खलित कर दे तो जानो कि अपने ब्रह्मचर्य व्रत का नाश कर दिया। (सत्यार्थप्रकाश, 3 समुल्लास) 6. ब्रह्मचर्य सेवन से यह बात होती है कि जब मनुष्य बाल्यावस्था में विवाह न करे, उपस्थेन्द्रिय का संयम रखे, वेदादिशास्त्रों को पढ़ते-पढ़ाते रहें। विवाह के पीछे भी ऋतुगामी बने रहें। तब दो प्रकार का वीर्य अर्थात् बल बढ़ता है, एक शरीर का और दूसरा बुद्धि का। उसके बढ़ने से मनुष्य अत्यन्त आनन्द में रहता है।(ऋग्वेदादिभाष्यभूमिका, उपासनाविषय) 7. ब्रह्मचारी और ब्रह्मचारिणी मद्य, मांस, गन्ध, माला, रस, स्त्री और पुरुष का संग, सब खटाई, प्राणियों की हिंसा, अङ्गों का मर्दन, बिना निमित्त उपस्थेन्द्रिय का स्पर्श, आंखों में अञ्जन, जूतों और छत्रधारण, काम-क्रोध, लोभ-मोह-भय-शोक-ईर्ष्याद्वेष, नाच-गान और बाजा बजाना, द्यूत, जिस किसी की कथा, निन्दा, मिथ्याभाषण, स्त्रियों का दर्शन, आश्रय, दूसरों की हानि आदि कुकर्मों को छोड़ देवें। (सत्यार्थप्रकाश, 3 समुल्लास) 8. जिस पुरुष ने विषय के दोष और वीर्य संरक्षण के गुण जाने हैं, वह विषयासक्त कभी नहीं होता । (सत्यार्थप्रकाश, 5 समुल्लास) 9. सब आश्रमों के मूल, सब उत्तम कर्मों में उत्तम कर्म और सब के मुख्य कारण ब्रह्मचर्य को खण्डित करके महादुःख सागर में कभी नहीं डुबना। (संस्कार विधि, वेदारम्भ संस्कार) 10.आयु वीर्यादि धातुओं की शुद्धि और रक्षा करना तथा युक्तिपूर्वक ही भोजन-वस्त्र आदि का जो धारण करना है, इन अच्छे नियमों से आयु को सदा बढ़ाओ। (ऋग्वेदादिभाष्यभूमिका, वेदोक्तधर्मविषय)
95.जो अपने दुखों को दूर करके दूसरों के भी दुःखों को दूर करता है , वही मोक्ष का अधिकारी है । 96.सोने से आधे घंटे पूर्व जल का सेवन करने से वायु नियंत्रित होती है , लकवा , हार्ट-अटैक का खतरा कम होता है । 97.स्नान से पूर्व और भोजन के बाद पेशाब जाने से रक्तचाप नियंत्रित होता है। 98 .तेज धूप में चलने के बाद , शारीरिक श्रम करने के बाद , शौच से आने के तुरंत बाद जल का सेवन निषिद्ध है 99. त्रिफला अमृत है जिससे वात, पित्त , कफ तीनो शांत होते हैं । इसके अतिरिक्त भोजन के बाद पान व चूना । 100. इस विश्व की सबसे मँहगी दवा लार है , जो प्रकृति ने तुम्हें अनमोल दी है ,इसे ना थूके। 🙏🙏
52. पीले केले में आयरन कम और कैल्शियम अधिक होता है । हरे केले में कैल्शियम थोडा कम लेकिन फास्फोरस ज्यादा होता है तथा लाल केले में कैल्शियम कम आयरन ज्यादा होता है । हर हरी चीज में भरपूर फास्फोरस होती है, वही हरी चीज पकने के बाद पीली हो जाती है जिसमे कैल्शियम अधिक होता है । 53. छोटे केले में बड़े केले से ज्यादा कैल्शियम होता है । 54.रसौली की गलाने वाली सारी दवाएँ चूने से बनती हैं । 55. हेपेटाइट्स A से E तक के लिए चूना बेहतर है । 56. एंटी टिटनेस के लिए हाईपेरियम 200 की दो-दो बूंद 10-10 मिनट पर तीन बार दे । 57. ऐसी चोट जिसमे खून जम गया हो उसके लिए नैट्रमसल्फ दो-दो बूंद 10-10 मिनट पर तीन बार दें । बच्चो को एक बूंद पानी में डालकर दें । 58. मोटे लोगों में कैल्शियम की कमी होती है अतः त्रिफला दें । त्रिकूट ( सोंठ+कालीमिर्च+ मघा पीपली ) भी दे सकते हैं । 59. अस्थमा में नारियल दें । नारियल फल होते हुए भी क्षारीय है ।दालचीनी + गुड + नारियल दें । 60. चूना बालों को मजबूत करता है तथा आँखों की रोशनी बढाता है । 61. दूध का सर्फेसटेंसेज कम होने से त्वचा का कचरा बाहर निकाल देता है । 62. गाय की घी सबसे अधिक पित्तनाशक फिर कफ व वायुनाशक है । 63. जिस भोजन में सूर्य का प्रकाश व हवा का स्पर्श ना हो उसे नहीं खाना चाहिए 64. गौ-मूत्र अर्क आँखों में ना डालें । 65. गाय के दूध में घी मिलाकर देने से कफ की संभावना कम होती है लेकिन चीनी मिलाकर देने से कफ बढ़ता है। 66.मासिक के दौरान वायु बढ़ जाता है , 3-4 दिन स्त्रियों को उल्टा सोना चाहिए इससे गर्भाशय फैलने का खतरा नहीं रहता है । दर्द की स्थति में गर्म पानी में देशी घी दो चम्मच डालकर पियें । 67.रात में आलू खाने से वजन बढ़ता है । 68.भोजन के बाद बज्रासन में बैठने से वात नियंत्रित होता है । 69.भोजन के बाद कंघी करें कंघी करते समय आपके बालों में कंघी के दांत चुभने चाहिए । बाल जल्द सफ़ेद नहीं होगा । 70.अजवाईन अपान वायु को बढ़ा देता है जिससे पेट की समस्यायें कम होती है 71.अगर पेट में मल बंध गया है तो अदरक का रस या सोंठ का प्रयोग करें 72. कब्ज होने की अवस्था में सुबह पानी पीकर कुछ देर एडियों के बल चलना चाहिए । 73. रास्ता चलने, श्रम कार्य के बाद थकने पर या धातु गर्म होने पर दायीं करवट लेटना चाहिए । 74. जो दिन मे दायीं करवट लेता है तथा रात्रि में बायीं करवट लेता है उसे थकान व शारीरिक पीड़ा कम होती है । 75. बिना कैल्शियम की उपस्थिति के कोई भी विटामिन व पोषक तत्व पूर्ण कार्य नहीं करते है । 76.स्वस्थ्य व्यक्ति सिर्फ 5 मिनट शौच में लगाता है । 77.भोजन करते समय डकार आपके भोजन को पूर्ण और हाजमे को संतुष्टि का संकेत है । 78.सुबह के नाश्ते में फल , दोपहर को दही व रात्रि को दूध का सेवन करना चाहिए । 79. रात्रि को कभी भी अधिक प्रोटीन वाली वस्तुयें नहीं खानी चाहिए । जैसे - दाल , पनीर , राजमा , लोबिया आदि । 80. शौच और भोजन के समय मुंह बंद रखें , भोजन के समय टी वी ना देखें । 81.मासिक चक्र के दौरान स्त्री को ठंडे पानी से स्नान , व आग से दूर रहना चाहिए । 82. जो बीमारी जितनी देर से आती है , वह उतनी देर से जाती भी है । 83. जो बीमारी अंदर से आती है , उसका समाधान भी अंदर से ही होना चाहिए । 84.एलोपैथी ने एक ही चीज दी है , दर्द से राहत । आज एलोपैथी की दवाओं के कारण ही लोगों की किडनी , लीवर , आतें , हृदय ख़राब हो रहे हैं । एलोपैथी एक बिमारी खत्म करती है तो दस बिमारी देकर भी जाती है । 85. खाने की वस्तु में कभी भी ऊपर से नमक नहीं डालना चाहिए , ब्लड-प्रेशर बढ़ता है । 86 .रंगों द्वारा चिकित्सा करने के लिए इंद्रधनुष को समझ लें , पहले जामुनी , फिर नीला ..... अंत में लाल रंग । 87 .छोटे बच्चों को सबसे अधिक सोना चाहिए , क्योंकि उनमें वह कफ प्रवृति होती है , स्त्री को भी पुरुष से अधिक विश्राम करना चाहिए 88. जो सूर्य निकलने के बाद उठते हैं , उन्हें पेट की भयंकर बीमारियां होती है , क्योंकि बड़ी आँत मल को चूसने लगती है । 89.बिना शरीर की गंदगी निकाले स्वास्थ्य शरीर की कल्पना निरर्थक है , मल-मूत्र से 5% , कार्बन डाई ऑक्साइड छोड़ने से 22 %, तथा पसीना निकलने लगभग 70 % शरीर से विजातीय तत्व निकलते हैं । 90. चिंता , क्रोध , ईर्ष्या करने से गलत हार्मोन्स का निर्माण होता है जिससे कब्ज , बबासीर , अजीर्ण , अपच , रक्तचाप , थायरायड की समस्या उतपन्न होती है । 91.गर्मियों में बेल , गुलकंद , तरबूजा , खरबूजा व सर्दियों में सफ़ेद मूसली , सोंठ का प्रयोग करें । 92. प्रसव के बाद माँ का पीला दूध बच्चे की प्रतिरोधक क्षमता को 10 गुना बढ़ा देता है । बच्चो को टीके लगाने की आवश्यकता नहीं होती है । 93. रात को सोते समय सर्दियों में देशी मधु लगाकर सोयें त्वचा में निखार आएगा 94. दुनिया में कोई चीज व्यर्थ नहीं , हमें उपयोग करना आना चाहिए।
योग,भोग और रोग ये तीन अवस्थाएं है। 2. लकवा - सोडियम की कमी के कारण होता है । 3. हाई वी पी में - स्नान व सोने से पूर्व एक गिलास जल का सेवन करें तथा स्नान करते समय थोड़ा सा नमक पानी मे डालकर स्नान करे । 4. लो बी पी - सेंधा नमक डालकर पानी पीयें । 5. कूबड़ निकलना- फास्फोरस की कमी । 6. कफ - फास्फोरस की कमी से कफ बिगड़ता है , फास्फोरस की पूर्ति हेतु आर्सेनिक की उपस्थिति जरुरी है । गुड व शहद खाएं 7. दमा, अस्थमा - सल्फर की कमी । 8. सिजेरियन आपरेशन - आयरन , कैल्शियम की कमी । 9. सभी क्षारीय वस्तुएं दिन डूबने के बाद खायें । 10. अम्लीय वस्तुएं व फल दिन डूबने से पहले खायें । 11. जम्भाई- शरीर में आक्सीजन की कमी । 12. जुकाम - जो प्रातः काल जूस पीते हैं वो उस में काला नमक व अदरक डालकर पियें । 13. ताम्बे का पानी - प्रातः खड़े होकर नंगे पाँव पानी ना पियें । 14. किडनी - भूलकर भी खड़े होकर गिलास का पानी ना पिये । 15. गिलास एक रेखीय होता है तथा इसका सर्फेसटेन्स अधिक होता है । गिलास अंग्रेजो ( पुर्तगाल) की सभ्यता से आयी है अतः लोटे का पानी पियें, लोटे का कम सर्फेसटेन्स होता है । 16. अस्थमा , मधुमेह , कैंसर से गहरे रंग की वनस्पतियाँ बचाती हैं । 17. वास्तु के अनुसार जिस घर में जितना खुला स्थान होगा उस घर के लोगों का दिमाग व हृदय भी उतना ही खुला होगा । 18. परम्परायें वहीँ विकसित होगीं जहाँ जलवायु के अनुसार व्यवस्थायें विकसित होगीं । 19. पथरी - अर्जुन की छाल से पथरी की समस्यायें ना के बराबर है । 20. RO का पानी कभी ना पियें यह गुणवत्ता को स्थिर नहीं रखता । कुएँ का पानी पियें । बारिस का पानी सबसे अच्छा , पानी की सफाई के लिए सहिजन की फली सबसे बेहतर है । 21. सोकर उठते समय हमेशा दायीं करवट से उठें या जिधर का स्वर चल रहा हो उधर करवट लेकर उठें । 22. पेट के बल सोने से हर्निया, प्रोस्टेट, एपेंडिक्स की समस्या आती है । 23. भोजन के लिए पूर्व दिशा , पढाई के लिए उत्तर दिशा बेहतर है । 24. HDL बढ़ने से मोटापा कम होगा LDL व VLDL कम होगा । 25. गैस की समस्या होने पर भोजन में अजवाइन मिलाना शुरू कर दें । 26. चीनी के अन्दर सल्फर होता जो कि पटाखों में प्रयोग होता है , यह शरीर में जाने के बाद बाहर नहीं निकलता है। चीनी खाने से पित्त बढ़ता है । 27. शुक्रोज हजम नहीं होता है फ्रेक्टोज हजम होता है और भगवान् की हर मीठी चीज में फ्रेक्टोज है । 28. वात के असर में नींद कम आती है । 29. कफ के प्रभाव में व्यक्ति प्रेम अधिक करता है । 30. कफ के असर में पढाई कम होती है । 31. पित्त के असर में पढाई अधिक होती है । 33. आँखों के रोग - कैट्रेक्टस, मोतियाविन्द, ग्लूकोमा , आँखों का लाल होना आदि ज्यादातर रोग कफ के कारण होता है । 34. शाम को वात -नाशक चीजें खानी चाहिए । 35. प्रातः 4 बजे जाग जाना चाहिए । 36. सोते समय रक्त दवाव सामान्य या सामान्य से कम होता है । 37. व्यायाम - वात रोगियों के लिए मालिश के बाद व्यायाम , पित्त वालों को व्यायाम के बाद मालिश करनी चाहिए । कफ के लोगों को स्नान के बाद मालिश करनी चाहिए । 38. भारत की जलवायु वात प्रकृति की है , दौड़ की बजाय सूर्य नमस्कार करना चाहिए । 39. जो माताएं घरेलू कार्य करती हैं उनके लिए व्यायाम जरुरी नहीं । 40. निद्रा से पित्त शांत होता है , मालिश से वायु शांति होती है , उल्टी से कफ शांत होता है तथा उपवास(लंघन) से बुखार शांत होता है । 41. भारी वस्तुयें शरीर का रक्तदाब बढाती है , क्योंकि उनका गुरुत्व अधिक होता है । 42. दुनियां के महान वैज्ञानिक का स्कूली शिक्षा का सफ़र अच्छा नहीं रहा, चाहे वह 8 वीं फेल न्यूटन हों या 9 वीं फेल आइस्टीन हों , 43. माँस खाने वालों के शरीर से अम्ल-स्राव करने वाली ग्रंथियाँ प्रभावित होती हैं । 44. तेल हमेशा गाढ़ा खाना चाहिएं सिर्फ लकडी वाली घाणी का , दूध हमेशा पतला पीना चाहिए । 45.छिलके वाली दाल-सब्जियों से कोलेस्ट्रोल हमेशा घटता है । 46. कोलेस्ट्रोल की बढ़ी हुई स्थिति में इन्सुलिन खून में नहीं जा पाता है । ब्लड शुगर का सम्बन्ध ग्लूकोस के साथ नहीं अपितु कोलेस्ट्रोल के साथ है । 47.मिर्गी दौरे में अमोनिया या चूने की गंध सूँघानी चाहिए । 48.सिरदर्द में एक चुटकी नौसादर व अदरक का रस रोगी को सुंघायें । 49. भोजन के पहले मीठा खाने से बाद में खट्टा खाने से शुगर नहीं होता है । 50.भोजन के आधे घंटे पहले सलाद खाएं उसके बाद भोजन करें । 51. अवसाद में आयरन , कैल्शियम , फास्फोरस की कमी हो जाती है । फास्फोरस गुड और अमरुद में अधिक है
ब्रह्मचर्य का पालन करने के लिए छोटे नियम अपनाएं: • सुबह जल्दी उठें, दिन की शुरुआत शांत मन से करें • शरीर को व्यस्त रखें, आलस्य से बचें • दृष्टि और विचार दोनों को शुद्ध रखें • अपने लक्ष्य को प्रतिदिन याद करें जो स्वयं पर नियंत्रण रखता है, वही सच्चा बलवान होता है।
ब्रह्मचर्य बाहर से नहीं, भीतर से शुरू होता है। जब विचार शुद्ध होते हैं, तब आचरण अपने आप शुद्ध हो जाता है। इसलिए सबसे पहले अपने मन को देखो, उसे समझो और धीरे धीरे उसे सही दिशा दो। यही सच्चा साधन है।
जब आप ब्रह्मचर्य का पालन करते हो, तो केवल आदत नहीं बदलती, पूरा व्यक्तित्व बदलने लगता है। आंखों में स्थिरता आती है, मन में स्पष्टता आती है, और जीवन में एक अलग आत्मविश्वास दिखने लगता है। यह बदलाव धीरे होता है, पर बहुत गहरा होता है।
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श्री हनुमान चालीसा संकट कटै मिटे सब पीरा... करें हनुमान चालीसा का पाठ दोहा : श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि। बरनऊं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।। बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार। बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।। चौपाई : जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुं लोक उजागर।। रामदूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।। महाबीर बिक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी।। कंचन बरन बिराज सुबेसा। कानन कुंडल कुंचित केसा।। हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै। कांधे मूंज जनेऊ साजै। संकर सुवन केसरीनंदन। तेज प्रताप महा जग बन्दन।। विद्यावान गुनी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर।। प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया।। सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा। बिकट रूप धरि लंक जरावा।। भीम रूप धरि असुर संहारे। रामचंद्र के काज संवारे।। लाय सजीवन लखन जियाये। श्रीरघुबीर हरषि उर लाये।। रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।। सहस बदन तुम्हरो जस गावैं। अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा। नारद सारद सहित अहीसा।। जम कुबेर दिगपाल जहां ते। कबि कोबिद कहि सके कहां ते।। तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा। राम मिलाय राज पद दीन्हा।। तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना। लंकेस्वर भए सब जग जाना।। जुग सहस्र जोजन पर भानू। लील्यो ताहि मधुर फल जानू।। प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं। जलधि लांघि गये अचरज नाहीं।। दुर्गम काज जगत के जेते। सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।। राम दुआरे तुम रखवारे। होत न आज्ञा बिनु पैसारे।। सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डर ना।। आपन तेज सम्हारो आपै। तीनों लोक हांक तें कांपै।। भूत पिसाच निकट नहिं आवै। महाबीर जब नाम सुनावै।। नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा।। संकट तें हनुमान छुड़ावै। मन क्रम बचन ध्यान जो लावै।। सब पर राम तपस्वी राजा। तिन के काज सकल तुम साजा। और मनोरथ जो कोई लावै। सोइ अमित जीवन फल पावै।। चारों जुग परताप तुम्हारा। है परसिद्ध जगत उजियारा।। साधु-संत के तुम रखवारे। असुर निकंदन राम दुलारे।। अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता। अस बर दीन जानकी माता।। राम रसायन तुम्हरे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा।। तुम्हरे भजन राम को पावै। जनम-जनम के दुख बिसरावै।। अन्तकाल रघुबर पुर जाई। जहां जन्म हरि-भक्त कहाई।। और देवता चित्त न धरई। हनुमत सेइ सर्ब सुख करई।। संकट कटै मिटै सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।। जै जै जै हनुमान गोसाईं। कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।। जो सत बार पाठ कर कोई। छूटहि बंदि महा सुख होई।। जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा। होय सिद्धि साखी गौरीसा।। तुलसीदास सदा हरि चेरा। कीजै नाथ हृदय मंह डेरा।। दोहा : पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप। राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।। होनी-अनहोनी से बचें, हनुमान चालीसा रोज पढ़ें इन 10 तरह की बाधा से बचाते हैं हनुमानजी
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युवाओं को मेरी सलाह 1. अपनी यौन इच्छाओं पर नियंत्रण ही आपकी सफलता या असफलता का कारण होगा। 2. पोर्न और हस्तमैथुन सफलता का सबसे बड़ा हत्यारा है। यह आपके मस्तिष्क को अवरुद्ध और नष्ट कर देता है। 3. ऊँट की तरह शराब पीने से बचें। अपने होश खोने और मूर्ख बनने से बुरा कुछ नहीं है। 4. अपने मानक ऊँचे रखें और किसी चीज़ से सिर्फ़ इसलिए संतुष्ट न हों कि वह उपलब्ध है। 5. अगर आपको कोई आपसे ज़्यादा होशियार मिले, तो उसके साथ काम करें, प्रतिस्पर्धा न करें। 6. कोई भी आपकी समस्याओं को बचाने नहीं आ रहा है। आपके जीवन की 100% ज़िम्मेदारी आपकी है। 7. आपको ऐसे लोगों से सलाह नहीं लेनी चाहिए जो जीवन में उस मुकाम पर नहीं हैं जहाँ आप पहुँचना चाहते हैं। 8. पैसे कमाने के नए तरीके खोजें। पैसे कमाएँ और उन मज़ाक करने वालों को नज़रअंदाज़ करें जो आपका मज़ाक उड़ाते हैं। 9. आपको 100 सेल्फ़-हेल्प किताबों की ज़रूरत नहीं है, आपको बस कार्रवाई और आत्म-अनुशासन की ज़रूरत है। अनुशासित रहें! 10. नशीली दवाओं से बचें। खरपतवार से बचें। 11. YouTube पर कौशल सीखें, नेटफ्लिक्स पर घटिया सामग्री देखने में अपना समय बर्बाद न करें। 12. कोई भी आपकी परवाह नहीं करता। इसलिए शर्मीलेपन को छोड़ें, बाहर जाएँ और अपने लिए अवसर बनाएँ। 13. आराम सबसे बुरी लत है और अवसाद का सस्ता टिकट है। 14. अपने परिवार को प्राथमिकता दें। भले ही वे बदबूदार हों, भले ही वे मूर्ख हों, उनका बचाव करें। उनकी नग्नता को छिपाएँ। 15. नए अवसर खोजें और अपने से आगे के लोगों से सीखें। 16. किसी पर भरोसा न करें। किसी एक पर भी नहीं, चाहे आपको कितना भी प्रलोभन क्यों न दिया जाए। खुद पर विश्वास रखें। 17. चमत्कार होने का इंतज़ार न करें। हाँ, आप हमेशा अकेले नहीं कर सकते, लेकिन लोगों की राय न सुनें। 18. कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प आपको कुछ भी हासिल करा सकता है। खुद को विनम्र बनाना ही आपको ऊँचा उठाता है। 19. खुद को खोजने का इंतज़ार करना बंद करें। इसके बजाय खुद को बनाएँ। 20. दुनिया आपके लिए धीमी नहीं होगी। 21. कोई भी आपका कुछ भी कर्जदार नहीं है। 22. जीवन एक एकल खिलाड़ी का खेल है। आप अकेले पैदा हुए हैं। आप अकेले मरने वाले हैं। आपकी सभी व्याख्याएँ अकेले हैं। आप तीन पीढ़ियों में चले गए हैं और किसी को परवाह नहीं है। आपके आने से पहले, किसी को परवाह नहीं थी। यह सब एकल खिलाड़ी है। 23. आपका जीवन पथ इस तरह से डिज़ाइन किया गया है कि आप हर समय ज़रूरतमंद, उदास और कमज़ोर महसूस करते हैं। और केवल एक ही रास्ता है, जो बाहर निकलने का फैसला करना है। आपके अलावा कोई भी खुद को और अपने प्रियजनों को नहीं बचा सकता। 24. हर किसी का दिल आपके जैसा नहीं होता। हर कोई आपके साथ उतना ईमानदार नहीं होता जितना आप उनके साथ हैं। आप ऐसे लोगों से मिलेंगे जो आपको अपने लाभ के लिए इस्तेमाल करेंगे और फिर अपने जीवन का वह हिस्सा बीत जाने और संतुष्ट होने के बाद आपको त्याग देंगे। जागते रहें। 25. 25 वर्ष की आयु तक, आपको इतना समझदार हो जाना चाहिए कि: →दूसरों की सफलता का जश्न मनाएँ →ईर्ष्या और जलन से बचें →खुले दिमाग रखें →अनुमान लगाने से बचें →इरादे से काम करें →कृतज्ञता का अभ्यास करें →ईमानदारी से बोलें →रोज़ाना व्यायाम करें →गपशप से बचें →स्वच्छ भोजन करें →माफ़ करें →सुनें →सीखें →प्यार करें
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