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  • ‘हरे कृष्ण’ नहीं था असली महामंत्र! 😱 भविष्य मालिका का महामंत्र कनेक्शन - वो रहस्य जो कोई नहीं बता रहा!👇 https://www.youtube.com/shorts/x_0S178k_PM

  • 12 авг.274из malikabhavishya

    बैशाख शुक्ल अष्टमीर । गुरुबारटि से दिनर ॥ रात्रर अर्द्धठारे जाण । दलाइ घाइटि प्रमाण ॥ भांगिण हेब नारखार । अन्यस्था होइबेटि नर ॥ पुष्या नक्षत्र शुभ योग । घाइ जे निश्चय भांगिब ॥ अर्थात् — महाप्रभु महापुरुष यशोवंत दास जी से कहते हैं कि— वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि होगी और उस दिन गुरुवार (बृहस्पतिवार) पड़ेगा। यह भली-भांति जान लो कि उसी दिन आधी रात के समय 'दलई घाई' निश्चित रूप से टूटेगा। टूटकर नारखार हो जाएगा और मनुष्य अन्य स्थान पर विस्थापित हो जाएंगे। पुष्य नक्षत्र शुभ योग में, वह घाई (तटबंध) निश्चित रूप से टूटेगा। ~ यशोवंत मालिका, महापुरुष यशोवंत दास

  • श्लोक: दळई घाई भाङ्गिब सेदिन गुरुवार । होइब वैशाख मास शुक्लपक्ष दशमी सुध ॥ हिन्दी अनुवाद: दळई घाई (तटबंध) उस दिन टूटेगा जब वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि होगी और गुरुवार का दिन होगा। श्लोक: गुपत दळई घाई उछुळि पडिब, गुप्ते गुप्ते जळस्तर पाताळ गमिब…

  • 11 авг.3331из bhavishyamalikanavyug

    श्लोक: दळई घाई भाङ्गिब सेदिन गुरुवार । होइब वैशाख मास शुक्लपक्ष दशमी सुध ॥ हिन्दी अनुवाद: दळई घाई (तटबंध) उस दिन टूटेगा जब वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि होगी और गुरुवार का दिन होगा। श्लोक: गुपत दळई घाई उछुळि पडिब, गुप्ते गुप्ते जळस्तर पाताळ गमिब । सेहि समय जाणि न पारिबे, पादे लागिब पाणी, तबे दास माळिका प्रमाण दिए ॥ हिन्दी अनुवाद: दळई घाई गुप्त रूप से उफान पर आ जाएगा और धीरे-धीरे (छिपकर) जलस्तर अत्यधिक बढ़ जाएगा। उस समय लोग कुछ समझ ही नहीं पाएँगे और अचानक पानी उनके पैरों तक आ पहुँचेगा; तब माळिका का वचन सत्य प्रमाणित होगा। --अच्युतानंद मालिका

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  • MUST WATCH 👉 2032 के बाद रुपया पैसा हो जाएगा बेकार? सोना और शेयर मार्केट का क्या होगा? https://youtu.be/eRcZw2hUS2w

  • 9 авг.3453из bhavishyamalikanavyug

    ହରି ଭଜୁଥା ହରି ନାମ ରଶିଧନ କରଥା ରେ । ତୁ କୃଷ୍ଣ ନାମ ରଶିଧନ କରଥା ରେ । ପଦ । କେ ତୋର ଜନନୀ, କେ ତୋର ବାନ୍ଧବ ଖାଇବା ଖେଳିବା ସୁଖ ସରଥା । ଗଲେ ଆଉ କାହିଁ ଏ ଦେହ ପାଇବୁ ଘନଶ୍ୟାମ ରୂପ ମନେ ଧ୍ୟାୟି ଥାରେ । ୧ । ଅର୍କ ଉଦ୍‌ଯୋଗରେ ଧନ ରଖିଅଛୁ ଚୋର ଘେନିଯିବ ଚେତା କରିଥା । ଛଟକେ ମାରିବ କେହି ନ ଦେଖିବ ଜ୍ୟୋତିପଥ ଥବ ମନେ ହେଜୁଥା ରେ । ୨ । ସ୍ୱର୍ଣ୍ଣଅଛୁ ବୋଲି ଘରେ ଥୁଆ ହୋଇ ନିଆଁ ପ୍ରାୟେ ନୀଳମଣି ଶୋଭିବା । ଟେକା ଅନାଉଲେ ତଳ ଗୁ ପଡ଼ିବୁ ତୁଲ ଶୂନ୍ୟ ରୂପ ବ୍ରହ୍ମକରଥା ରେ । ୩ । ଡୋଳାକୁ କାଳ, କମଳ ବେଢ଼ିଛନ୍ତି ଖାଲେ ବେଢ଼ିଛନ୍ତି ନାଥ ଦେବତା । ଅନନ୍ତ ଅବ୍ୟକ୍ତ ଅଣାକାର ବ୍ରହ୍ମ ବୋଲେ ତୁ ଚନ୍ଦ୍ରସେନ ହୁଅ ଦେବତା ରେ । ୪ । उड़िया देवनागरी: हरि भजुथा हरि नाम रशिधन करथा रे । तु कृष्ण नाम रशिधन करथा रे । पद । के तोर जननी, के तोर बांधव खाइबा खेलिबा सुख सरथा । गले आउ काहिँ ए देह पाइबु घनश्याम रूप मने ध्यायि थारे । १ । अर्क उद्योगरे धन रखिअछु चोर घेनियिब चेता करिथा । छटके मारिब केहि न देखिब ज्योतिपथ थब मने हेजुथा रे । २ । स्वर्णअछु बोलि घरे थुआ होइ निआँ प्राये नीलमणि शोभिबा । टेका अनाउले तळ गु पडिबु तुल शून्य रूप ब्रह्मकरथा रे । ३ । डोळाकु काळ, कमळ बेढ़िछन्ति खाले बेढ़िछन्ति नाथ देवता । अनन्त अव्यक्त अणाकार ब्रह्म बोले तु चन्द्रसेन हुअ देवता रे । ४। हिंदी अनुवाद: हरि का भजन करते रहो स्थाई: हरि के नाम रूपी धन को एकत्र/संचित करते रहो। तू श्री कृष्ण के नाम रूपी धन को ही संचित करता रह। पद १: कौन तुम्हारी माता है और कौन तुम्हारा संबंधी/बंधु है? यह खाने-खेलने का सारा सांसारिक सुख एक दिन समाप्त हो जाएगा। यदि यह मानव शरीर एक बार चला गया तो फिर कहाँ मिलेगा? इसलिए अपने मन में निरंतर भगवान घनश्याम (श्री कृष्ण) के रूप का ध्यान करते रहो। पद २: कठिन परिश्रम (उद्योग) से जो धन तुमने जमा कर रखा है, उसे चोर (काल/संसार) चुरा ले जाएगा, इसलिए सतर्क रहो। काल झटके में (अचानक) प्राण हर लेगा और कोई देख भी नहीं पाएगा, इसलिए उस परम ज्योति के मार्ग को अपने मन में निरंतर याद रखो। पद ३: जैसे सोना घर में रखा रहता है, अग्नि की भाँति नीलमणि (श्री कृष्ण) की आभा सुशोभित होती है। यदि तुम घमंड में सिर ऊँचा करके चलोगे तो नीचे गिरोगे, इसलिए उस अतुलनीय निराकार ब्रह्म का अपने मन में ध्यान करो। पद ४: नेत्रों की पुतलियों को काल घेरे हुए है और कमल की तरह ढका है, और इस शरीर रूपी खड्ड (गड्ढे) को प्रभु-देवता घेरे हुए हैं। वे अनंत, अव्यक्त और निराकार ब्रह्म हैं; कवि 'चंद्रसेन' कहते हैं कि हे मन! तुम उस देव स्वरूप ईश्वर में लीन हो जाओ। -- पंचसखा भजन

  • भविष्य मालिका में वर्णित भगवान का वो नाम जिसकी महिमा हर युग में और हर समय अक्षुण्ण रहती है । शायद इसी लिए इस नाम का भविष्य मालिका और सनातन शास्त्रों में भी सब से अधिक गुणगान किया गया है एवं इस नाम को ही तारक मंत्र कहा गया है। इस नाम का एक अक्षर पुरुष और एक अक्षर प्रकृति को प्रस्तुत करता है। यानी कि साक्षात निराकार परमात्मा / परम ब्रह्म का शब्द स्वरूप। https://youtu.be/xXdG8Wymm-c

  • भविष्य मालिका में कदाचित सब से ज्यादा वर्णित कलियुग से उद्धार का महामंत्र: बेद रे स्तुतिरे गोपन, हरे राम मन्त्र सार सकळ मन्त्र ए गर्भर,अण अक्षर एकाक्षर तारक श्य़ाम पञ्चाक्षर, हरे राम मिशिण पाञ्च ए पाञ्च मन्त्र मूळ सञ्च, अण अक्षर मूळ होइ एक अक्षर अङ्कुरइ, तारक अटइ ये डाळ श्य़ाम पञ्चाक्षर फुल, हरेराम ये फळ होइ - गुरुभक्ति गीता वेद और स्तुति में जिसे गुप्त कर दिया गया है वही 'हरे राम' मन्त्र सब का सार है! सब मन्त्र इसके गर्भ में स्थित है | इसके समझाते हुए महापुरुष कहते है की अणाक्षर मन्त्र मूल है, एकाक्षर मन्त्र इसका अंकुर है, तारक मन्त्र इसकी डाली है, श्याम पंचाक्षर मन्त्र इसका फुल है और 'हरे राम' मंत्र इसका फल है | यानी की चैतन्य महाप्रभु ने दिया हुआ 'हरे कृष्ण' महामंत्र जो असल में 'हरे राम' से शुरू होता था और बाद में उलट पुलट होके 'हरे कृष्ण' मन्त्र हो गया जिसका कलि संतरण उपनिषद जैसे ग्रंथो में भी उल्लेख है वही इस वृक्ष का फल है | तात्पर्य ये है की कलियुग में यही महामंत्र सब तत्वों का सार है और इसकी शरण में रहने से ही उद्धार होगा!

  • 7 авг.356из bhavishyamalikanavyug

    କର୍ଣ୍ଣାଟ କେରଳ ଦେଶ ଆଦି କରି, ତହିଁରେ ମୋହର ଭଗତ ଆସି ॥ ୪୧ ॥ ମଗଧ ମଗଧ ଅନେକ ଭାଷା, ତେହିଁ ଭଗତ ଗଣନ୍ତି ପୂଜା ॥ ୪୨ ॥ ୪୪(ଅ) ତିଲଙ୍ଗ ଆଗାର ମାଧୁର ସହିତେ, କୁଲକିଳା ଗୋପ ଅଞ୍ଚଳ ନଗରେ ॥ ୪୩ ॥ ନେପାଳ ହେୟାଳି ହିମାଳ ଅଞ୍ଚଳ, ଦେଶ ପ୍ରଦେଶ ସମସ୍ତ ଅଞ୍ଚଳ ॥ ୪୪ ॥ ଭୋକା କାଳରେ ନେବେ ହନ୍ତହୁନ୍ତି, ତହିଁରେ ଭଗତ ସାଧିବେ ସିଦ୍ଧି ॥ ୪୫ ॥ ଉତ୍କଳ ଓଡ଼ିଆ ମୋ ଭଗତ କେତେ, ଶ୍ରୀପୁର ତ୍ରିପୁରା ଆସାମ ସମସ୍ତେ ॥ ୪୬ ॥ ୪୬(କ) କଥା କହିବା ଗାଆଁ ଗୋଦିଆ, ଜଗତ ଅଟନ୍ତି କଲିକତା ସୀମା ॥ ୪୭ ॥ ଉଦୟ ବର୍ତ୍ତେ ହୋଇଥିଲେ ଅଛନ୍ତି, ଦେଖିବା ସେଠାରେ ସୋଅଂଶ ବୁଝନ୍ତି ॥ ୪୮ ॥ ସତ୍ୟ ଭଗତ ଦେଶରେ ଅଛନ୍ତି, ସତ୍ୟ ଜଗନ୍ନାଥ ଭଗତ ପ୍ରୀତି ॥ ୪୯ ॥ हिंदी अनुवाद: कर्नाटक, केरल आदि देशों से लेकर मेरे भक्त यहाँ आते हैं। मगध क्षेत्र और अनेक भाषाओं वाले प्रदेशों में भी भक्त प्रभु-पूजा में लीन रहते हैं। तेलंगाना, मथुरा के साथ-साथ कुलिकिला, गोप क्षेत्र और नगरों में भी भक्त बसे हैं। नेपाल, पहाड़ी (हियाली) क्षेत्रों तथा हिमालय के समस्त अंचल एवं विभिन्न देशों-प्रदेशों के सभी भागों में भक्तों का विस्तार है। कठिन समय या संकट काल में भी वहाँ के भक्त साधना करके सिद्धि प्राप्त करेंगे। उत्कल (ओडिशा) में मेरे अनेक उड़िया भक्त हैं, साथ ही श्रीपुर, त्रिपुरा और असम में भी सब फैले हुए हैं। छोटे-छोटे गाँवों से लेकर कोलकाता की सीमा तक समस्त जगत् में भक्त विद्यमान हैं। जो उदय काल में प्रकट हुए थे, वे आज भी स्थित हैं; वहाँ देखने पर ज्ञात होता है कि वे प्रभु के अंश को भली-भांति समझते हैं। इस देश में सच्चे भक्त निवास करते हैं और सत्य स्वरूप श्री जगन्नाथ जी के प्रति भक्तों का अगाध प्रेम है। -- आगत भविष्य लेखन मालिका ~ अच्युतानंद दास

  • 7 авг.3852из malikabhavishya

    नामु राम को कलपतरू कलि कल्यान निवासु| जो सुमिरत भयो भांग तें तुलसी तुलसीदास|| प्रस्तुत दोहे में तुलसीदासजी कहते हैं कि भगवान श्रीरामचंद्रजी का नाम इस कलियुग में कल्पवृक्ष अर्थात मनचाहा फल प्रदान करने वाला है और कल्याण का निवास अर्थात मुक्ति का घर है, जिसका स्मरण करने से तुलसीदास भांग से अर्थात विषय मद से भरी और दूसरों को भी विषयमद उपजाने वाली साधुओं द्वारा त्याज्य स्थिति से बदलकर तुलसी के समान निर्दोष, भगवान का प्यारा, सबका आदरणीय और जगत को पावन करने वाला हो गया| ~ दोहावली, तुलसीदास

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